रविवार, 21 अप्रैल 2024

बेबात की बात 10 : हिंदी ग़ज़ल में बह्र और वज़न दिखाने का सही तरीक़ [ क़िस्त 02]

 चर्चा-परिचर्चा : बह्र और वज़न दिखाने का सही तरीक़ा [क़िस्त 02]

[ पिछली क़िस्त में ग़ज़ल या शे’र के बह्र/वज़न दिखाने के सही तरीक़े पर चर्चा कर रहा था। उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए----]
अरूज़ बहुत ही आसान और रोचक विषय हैअगर इसे विधिवत और ध्यान से पढ़ा जाए, धैर्य और लगन से समझा जाए। ख़ैर।
ग़ज़ल में बह्र या वज़न दिखाने का सही तरीक़ा A---B---C---D फ़ार्मेट में ही होना चाहिए । मगर कुछ लोग इसे A/B/C/D रूप में भी दिखाते है।
यह कहीं लिखा हुआ नही है कि कैसे दिखाना है। यह व्यक्तिगत रूचि का प्रश्न है। मैं व्यक्तिगत रूप से A---B---C---D रूप में ही दिखाना पसन्द करता हूँ जिससे रुक्न/अर्कान की स्पष्टता, सुपाठ्य और समझ बनी रहे।
A---B---C---D क्या हैं ? बह्र में यह अपने अपने मुक़ाम पर प्रयुक्त मान्य और वैध ’रुक्न’ को प्रदर्शित करते है। मान्य और वैध रुक्न से मेरी मुराद --वह रुक्न जो अरूज़ के नियमों से बने हों । यह सालिम रुक्न [ जैसे 122, या 212 या 1222 या 2122 या 2212 आदि] हो सकते हैं या फिर कोई मुज़ाहिफ़ रुक्न [ वह रुक्न जो सालिम रुक्न पर ज़िहाफ़ लगाने से बरामद होते हैं ]
यहाँ कुछ मुज़ाहिफ़ रुक्न आप की जानकारी के लिए लिख रहा हूँ । नाम आप बताइएगा।
222
21
22
2121
2112
2
1221
1212
121
1122
ऐसे ही और कुछ मुज़ाहिफ़ रुक्न --जो सालिम रुक्न पर ज़िहाफ़ के अमल से बनते है । ज़िहाफ़ात --खुद में एक विस्तॄत विषय है जिसकी यहाँ चर्चा नहीं की जा सकती।
यदि आप इच्छुक हों तो मेरे ब्लाग www.arooz.co.in पर देख सकते हैं।
अत: यह स्पष्ट है कि A-B-C-D ्के मुक़ाम पर कोई न कोई रुक्न ही होगा जो मान्य भी होगा और वैध भी होगा जो अरूज़ के नियमों से बना भी होगा।
अपने मन से या मनमानी तरीके से वज़न 1. या 2 के कम्बिनेशन का कुछ भी नहीं लिख सकते।
उदाहरण के लिए--एक बह्र है
1212--1122--1212--22 इसे आप पहचानते होंगे और शायद नाम भी जानते होंगे। अगर नहीं तो गूगल पर खोजिएगा --मिल जाएगा।
अगर इसको हम ऐसे लिख दें -121211-22-121-222 --तो कैसा रहेगा?
या ऐसे लिख दें-12121122121222 तो कैसा रहेगा ? बिलकुल ’CONFUSIVE ’ रहेगा। कुछ भी स्पष्ट न होगा। अच्छे खासे मानूस बह्र की शक्ल ही बिगड़ जाएगी।
अत: इस बहर को
1212--1122--1212--22 फ़ार्म में लिखें तो पता चलेगा कि
-A-के मुक़ाम पर कौन सा रुक्न है [ मुज़ाहिफ़ रुक्न है कि सालिम रुक्न ] और यह रुक्न बना तो कैसे बना?ऐसे ही -B, C. D--मुक़ाम के अर्कान की हैसियत क्या है ?
ध्यान रहे, यह मात्र एक सलाह है। मानने न मानने की कोई बाध्यता नही ।मरजी आप की । बिना इसके भी आप की शायरी कर सकते हैं। कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा।
उर्दू में यह प्रश्न नहीं उठता --वो लोग रुक्न के नाम से ही बह्र का नाम लिखते है [ जैसे फ़ाइलुन, मुसतफ़लुन,, मुतफ़ाइलुन---वग़ैरह वग़ैरह।
समस्या हिंदी ग़ज़ल में अर्कान 1 और 2 की कम्बिनेशन में दिखाने की है।
सादर
-आनन्द.पाठक-

बेबात की बात 09: हिंदी ग़ज़ल में बह्र और वज़न दिखाने का सही तरीक़ा [क़िस्त 01]


बेबात की बात 09 : बह्र और वज़न दिखाने का सही तरीक़ा [क़िस्त 01]

पिछले अंक में में मैने एक चर्चा की थी कि जब ग़ज़लें हिंदी [ देवनागरी]
में लिखी जाने लगी तो क्या क्या मसले लेकर आईं। उन्ही मसलों में एक मसला
ग़ज़ल के --बह्र और वज़न -दिखाने के तरीक़े का भी है।
चूँकि ग़ज़ल उर्दू की एक काव्य विधा है अत: बहुत से नियम कायदे क़ानून उर्दू अरूज़ से सीधे लेलिए गए मगर हम हिंदी वाले बहुत कुछ अपने हिसाब से और अपनी सुविधा से एक अन्य व्यवस्ठा बना लिए हैं।
इस व्यवस्था में अर्कान को दिखाने के लिए
122--/212--1222 ---यानी computer की भाषा में Binarry System जैसा कुछ। या फिर
लघु--दीर्घ--लघु--दीर्घ-- या 1SS--S1S--1SSS -आदि व्यवस्था बना ली
कुछ मित्रों ने तो अपनी सुविधा के लिए--ललाला--लाला -ललाला -लाला-जैसी व्यवस्था भी बना ली है।
मगर उर्दू वाले आज भी अपने अर्कान के नाम --फ़ेलुन--फ़ाइलुन--मफ़ाईलुन--
हरकत--साकिन--सबब-वतद आदि व्यवस्था पर भरोसा करते है।
उदाहरणत:--
उर्दू वाले बह्र-ए-मुतदारिक मुसम्मन सालिम बह्र को
फ़ाइलुन--फ़ाइलुन--फ़ाइलुन --फ़ाइलुन दिखाएंगे । जब कि हम हिंदी वाले [ सभी नहीं] इसी चीज़ को
212- -212-------212-----212- से दिखाते हैं ।
गड़बड़ तब हो जाती है जब हमारे कुछ मित्र इसी चीज़ को यूँ दिखाते है
212212212212 जो बह्र के स्वरूप को पहचानने में दिक्कत होती है। मात्रा भार वज़न बराबर हो सकता है
थाली में भोजन के अवयव सब हैं मगर परोसने का ढंग सही नहीं है।
उसी प्रकार
बह्र-ए-रमल मुसद्दस सालिम को उर्दू वाले
फ़ाइलातुन --फ़ाइलातुन --फ़ाइलातुन कर के दिखाएँगे । मगर हम हिंदी वाले इस को
2122-------- 2122------2122 कर के दिखाते हैं।
दोनॊ व्यवस्था में कोई अन्तर नही है । दोनों व्यवस्था एक ही बह्र को प्रदर्शित करते है ।
गड़बड़ तब हो जाती है जब हमारे कुछ मित्र इसी चीज़ को यूँ दिखाते है
2122212222122--ऐसे दिखाना ठीक नही है।

एक बार एक सज्जन ने
2122--1212--112 को इस प्रकार दिखा दिया
21221212112---ऐसे दिखाना ठीक नही है। कारण 21221212112 --जैसा कोई रुक्न ही नहीं है । तो भइया ऐसे क्यों दिखाते हो।
या
221--1222--221--1222 को
2211222 2211222 जैसे दिखाना ठीक नहीं है॥ कारण वही --2211222 -जैसा कोई रुक्न नही होता।
122 हो या 221 हो या 2121 हो या 1221 हो--यह सभी एक रुक्न को प्रदर्शित करते है एक इकाई को प्रदर्शित करते है एक वज़न को प्रदर्शित करते हैं।
एक बात और -कि यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर नए नए लोगों के लिए तो ठीक हैं मगर Full Proof नहीं है । कारण -1- हम मुतहर्रिक हर्फ़ के दिखाने के लिए भी प्रयोग करते है और साकिन हर्फ़ दिखाने के लिए भी ।
221--2121--1221--2121 [ इस बहर को आप पहचानते होंगे।
221--का -1- और आख़िरी 2121 का -1- क्या एक ही है ? नहीं --पहला -1- [ मुतहर्रिक] है और आख़िरी -1- [ साकिन ] है मगर दिखाया दोनो को -1- से ही जाता है।
आप जानते है कि 122--या 212--या 1222 सिर्फ़ एक संख्या या डिजिट मात्र नहीं है अपितु यह किसी न किसी मान्य व वैध रुक्न का Numerical Representation मात्र हैऔर किसी बह्र में इनके क्रम निर्धारित रहते है। हम अपने मन से यह क्रम बदल नही सकते। इन्हे मनमाने ढंग से नहीं लिख सकते।
प्राय: लोगों को यह कहते हुए आप ने सुना होगा कि हम किसी 1 1 =2 कर सकते है । जी नहीं । हमेशा नहीं। यह कोई Mathematical operation नहीं है वैसे ही जैसे टेलिफ़ोन के नं पर Mathematical operation नहीं हो सकता।
हाँ यह सच है कि कभी कभी 1 1 =2 कर सकते हैं मगर उसकी कुछ शर्तें होती हैं। कुछ विशेष परिस्थितियाँ होती हैं । अभी यहाँ उस पर विवेचना नहीं करूँगा।
हमारे एक मित्र थे -प्राण शर्मा जी । अच्छे ग़ज़लकार थे। ख़ुदा मग़फ़िरत करे। उनसे प्राय: बात होती थी। वह कहा करते थे--पाठक जी ! ग़ज़ल के ऊपर बह्र [ वज़न] लिखने का कोई मतलब नहीं है।जो अरूज़ के जानकार है वह बह्र समझ जातें है और जो जानकार नहीं है उन्हे लिखने न लिखने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। मैं हर बार हँस कर यही कहता था ---क्या करें सर ! ये मंच वाले मानते ही नहीं इसरार करते रहते है। ख़ैर।
सवाल यह कि --तो फिर हम क्या करें।
1- अगर आप बह्र वज़न और रुक्न जानते हैं या समझते हैं तो ग़ज़ल के ऊपर ज़रूर लिखे और हो सके तो उस रुक्न [ वज़न] का नाम भी लिख दें
2- अगर नहीं जानते हैं तो बेहतर है कि न ही लिखें । गडम गड कर के न लिखें।
आप पाठकों की राय क्या है -ज़रूर बताएँ।
सादर
-आनन्द.पाठक-